Friday, 5 October 2012

किसी ने आज कहा हमने बोलना छोड़ दिया 
हमने कहा, आप क्या जाने खामोसी भी बोलती है जनाब ....................
खामोसी को खामोश ही रहने दो कोई नाम न दो , 
जिसे आज तक नाम दिया वही बदनाम हो गये ! 

दो पल की मिली जब मुझे ये जिंदगी
 तो ख्याल आया आपका की आपके साथ जियेंगे 
पर अगले हे पल याद आया
हमारे बाद आप क्या करेंगे

Wednesday, 3 October 2012

आज उनसे फिर बात हुई,
वही नाराजगी वही, वही खुराफात हुई !
नादाँ हु मैं जानती हु,
पर जानना चाहती हु उन्हें  बस यही बात हुई !
आतीत था कोई साथ उनके शायद यही डर सताता है उन्हें ,
यकीं मानिये हमें वास्ता नहीं आतीत से बस यही दरखवास्त हुई !
हर रिश्ता पाक है नजरो में हमारी ,
अब यही से  नयी शुरूवात हुई !
अर्श से फर्श तक बखरे है शब्द उनके 
अब बस यही हमारी कायनात हुई !
वो जो आदत थी कभी उनके साथ ,
आज हम है तो बस आज हमारे साथ ये वारदात हुई !



                                                                                                                           kavita ki kavita se

Monday, 1 October 2012

जब कभी रोये उनसे गले लग कर तो लगा 
यू रोना ठीक नहीं पर अलग होने  के ख्याल ने और रुला दिया.........
नहीं जानती है क्या ये एहसास 
पर दूर मत होना यही है दरख्वास्त .............
kavitasinghnayal@gmail.com

Wednesday, 26 September 2012


मैं अक्स हु तेरे वजूद का तेरी सासे बाया करती है
तू जो दूर  बैठा है मुझसे तेरी आखे बाया करती है
तेरी चाहत तेरी बाते तेरे होने की आहट बाया करती है
तेरी खुशबु से महक जाये जिस्म मेरा मेरे एस जहा में होने की हकीकत बया करती है ........


आज शायद  सारी रस्मे तोड़ दू ,
आज शायद दुनिया से मुह मोड़ लू !
लग जाओ गले आपके सारी हया  छोड़ दू ,
आज शायद हर बंदिश तोड़ दू !
नहीं जानती क्यों डरती हु दूर जाने से आपके ,
पर कर सकू बगावत तो किस्मत का रुख मोड़ दू !
सुकून मिलता है आगोश में आपके ,
आज शायद हर गम से नाता तोड़ दू !

आ जाओ , बस आ जाओ कभी न रूठने के लिए
कभी न छुटने के लिए बस आ जाओ !